Psychology

साइकोलॉजी, मानव व्यवहार के बारे में मनोविज्ञान के तथ्य, शरीर विज्ञान meaning in Hindi

Human psychology

मानव को समझना उसे जानना, पहचानना ह्यूमन साइकोलॉजी के दायरा में आता है. मानव व्यवहार के बारे में मनोविज्ञान के तथ्य, साइकोलॉजी, शरीर विज्ञान meaning in Hindi, ह्यूमन साइकोलॉजी का प्रयोग करके एक इंसान दुसरे इंसान के behavior को देखकर समझकर उसे पहचान सकता है. की वह किस  विषय में सोच रहा है. उसके रहन सहन व body language से पता लगाया जा सकता है. और वह किस तरह की मानसिकता रखता है. उसका नेचर कैसा है. और किस तरह की फैमली से बिलोंग करता है. वह निम्न स्थर का है. या उच्च स्थर का इत्यादि तरीको से उसे देखकर पता लगाया जा सकता है. केवल उसे देखकर आप पता लगा सकते है. की उसका ह्यूमन नेचर क्या है. इत्यादि तरीको से ह्यूमन psychology को पहचाना जाता है.

ह्यूमन साइकोलॉजी की अधिकतर पहचान जब हम किसी भी फील्ड में इंटरव्यू देने जाते है. या किसी फील्ड से कुछ कंपनी के मुख्य पर्सन या कंपनी का बॉस इंटरव्यू लेने के लिए कॉलेज या किसी फील्ड आर्गेनाईजेशन में जाते है. तो वहां पर ह्यूमन साइकोलॉजी को बहुत ही बारीखी से जज किया जाता है. इन्टरव्यू लेने वाले जो मुख्य होते है. वो सामने वाली की मानसिकता को बहुत जल्दी ही समझ जाते है. ऐसा इसलिए होता है. की वो इस फील्ड के एक्सपर्ट होते है. उन्हें ह्यूमन साइकोलॉजी के बारे में पहले से ही जानकारी होती है. वो सामने वाले को देखकर व उसके बोलने के तरीके से उसके हाव भाव,व उसके questioning के द्वारा और body language देखकर  समझ जाते है.की  सामने वाली की मानसिकता किस डायरेक्शन में है.

Human psychology

अगर आप उनके कम्पनी के अनुसार फिट बैठते है, तो आपको सेलेक्ट कर लेंगे नही तो आपको बाहर का रास्ता दिखा देंगे ऐसे ही आईएस आईपीएस या एयरफोर्स या सरकारी जॉब्स से सम्बंधित जो इंटरव्यू लेने वाले होते है. वो भी ह्यूमन साइकोलॉजी को बहुत बारीखी से देखते है वो ये देखते है की आप जिस भी फील्ड में जाने वाले हो अगर उससे रिलेटेड आपके अन्दर विचार है. और आप अपने विचार के परे सोच पाते है किसी भी चीज़ को आप तुरंत सोच पाते है कि नही, ये सारी चीजे जज करते है.

अगर आपका दिमाग solution oriented है. तो 100% chance है की आपको ले लिया जाएगा अगर आपका दिमाग problem oriented है. तो स्वभाभिक है की आपको नही लिया जाएगा क्योकि कि किसी भी प्रॉब्लम का सलूशन निकालने के लिए आपका दिमाग solution oriented होना अत्यंत जरूरी है. तभी आप किसी भी फील्ड में सक्सेसफुल पर्सन बन सकते है, ह्यूमन साइकोलॉजी में इन कई कारको को जज किया जाता है. कि आपका दिमाग किस डायरेक्शन में काम करता है, और आपका body language किस दिशा में संकेत करती है और आपका ह्यूमन behavior लोगो के प्रति किस तरह का है.

Human behavior

अगर आपका human behavior अच्छा है तो आपका सेलेक्ट होने के Chances कई गुना बढ़ जाता है. ये सिर्फ किसी भी फील्ड में इंटरव्यू लेने वाले बस नही करते, ये आपके आसपास रहने वाले लोग भी आपको देखकर जज करते रहते है. लेकिन मज़े की बात तो ये है कि सब कोई इसे अच्छी तरह नही समझ पाता है क्योकि उनकी कंडीशनिंग उस हिसाब से नही होती है.

जिसकी जिस हिसाब से कंडीशनिंग होती है वह उस हिसाब से जज करता है. Perfectly कोई भी जज नही कर पता है. लेकिन जो बेसिक चीज़े होती  है. वह हर इंसान के समझ में आ जाता है. लेकिन अच्छी तरह से वही पर्सन ह्यूमन साइकोलॉजी को समझ पता है. जो इंसान खुद को अच्छी तरह से जानता होगा तो वही सामने वाले को भी बहुत ही अच्छी तरह से समझ पायेगा जो इंसान खुद को नही जानता वह सामने वाले को कैसे जानेगा.

Physiology meaning in Hindi

फिजियोलॉजी का अर्थ. है। फिजियोलॉजी, फिजियोलॉजी की स्थिति आदि सभी प्रकार के विकार फिजियोलॉजी समस्या के अंतर्गत आते हैं।

लड़के और लड़की के बारे में मनोवैज्ञानिक तथ्य

लड़कियों को हमेशा बड़े लड़के पसंद आते हैं। इसलिए लड़कियां जल्दी परिपक्व हो जाती हैं। और लड़के हमेशा छोटी लड़कियों को पसंद करते हैं। लड़कियों को दाढ़ी वाले और लम्बे लड़के ज्यादा पसंद आते हैं। और कम हंसने वाले लड़कों को ज्यादा पसंद किया जाता है। और लड़कों को ज्यादा हंसने वाली लड़कियां पसंद आती हैं। अगर लड़के और लड़कियां दोनों एक दूसरे को देखते हैं। तो दोनों की धड़कन बढ़ जाती है।

फिजिकल साइकोलॉजी

ये साइकोलॉजी ऐसी साइकोलॉजी होती हैं। जो फिजिकल एक्टिविटी पर आधारित होती है, फिजिकल एक्टिविट इंसान के शारीरिक क्षमता को दर्शाती है. व शारीरिक क्षमता से पता चलता है की इंसान की साइकोलॉजी किस डायरेक्शन में काम करती है. इसका सीधा-सादा सम्बन्ध शारीरिक एक्टिविटी करने से होता है और इसे सही तरीके से किये जाये तभी यह अच्छे से काम करता है.

जैसे यदि हम जिम में कोई exercise करते है अगर हम इसे ट्रेनर से अच्छी तरह से समझकर सही तरीके से हर चीज़ कर रहे है. तो यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही अच्छा है अगर हम किसी चीज को बिना किसी से समझे अपने तरीके से किये जा रहे है. तो यह हमारे लिए बहुत ही हानिकारक है, अब बात यह आती है. कि ये साइकोलॉजी से  किस तरह से सम्बंधित है तो फिजिकल एक्सरसाइज हमारे लुक को दर्शाती है.

और साइकोलॉजी के हिसाब से लुक हमारे जीवन में बहुत मायने रखता है लुक हमे आकर्षित करता है लोगो के प्रति लुक से हम किसी के भी प्रति बहुत जल्दी आकर्षित हो जाते है. लुक से हमारी पर्सनालिटी Develop होती है. जिससे की बॉडी language सही दिशा में काम करने लगती है. इससे हमारी साइकोलॉजी स्थिति सही होने लगती है जिससे की हम खुशी महसूस करने लग जाते है. इसलिए फिजिकल एक्सरसाइज को करने से हमारी साइकोलॉजिकल स्थिति सही डायरेक्शन में काम करने लग जाती है. इसलिए हमारे जीवन में फिजिकल एक्सरसाइज होना अति आवश्यक है.

रिलेशनशिप साइकोलॉजिकल

रिलेशनशिप साइकोलॉजी के माध्यम से एक अच्छी रिलेशनशिप को बिल्ड करने के लिए बहुत से रोल प्ले करने होते है. तभी एक अच्छी रिलेशनशिप लम्बे समय तक चलती है घर में हम अलग तरह से रोल प्ले करते है. ऑफिस में अलग तरह के रोल प्ले करते है. और कंपनी में अलग तरह का रोल प्ले करते है हमे हर जगह अलग अलग रोल प्ले करना होता है तभी हम Survive कर पाते है.

जैसे अगर हम अपने घर में जिस तरह का रोल प्ले करते है, उसी तरह अगर हम कंपनी के किसी भी कर्मचारी के साथ या अपने बॉस के साथ वैसे ही व्यवहार करेंगे जैसे अपने घर में करते है. तो स्वभाबिक है हमे निकाल दिया जाएगा इनमे से एक रोल जो है वह है सामने वाले पर्सन से किसी चीज़ की उम्मीद करना ये हमारे रिलेशनशिप को कई हद तक दर्शाते है. अगर हम अपनी खुशी से सामने वाले की उम्मीद को पूरा करते है, तो साइकोलॉजिकल इफ़ेक्ट हमारे जीवन में बहुत अच्छा पड़ता है. अगर हम सामने वाले की उम्मीद को उसके अनुसार पूरा करे जिनको करने में हमारा कोई इंटरेस्ट नही है तो ये हमारे दिमाग को साइकोलॉजिकल बुरा इफ़ेक्ट डालते है.

रिलेशनशिप एक Bond की तरह होता है जिसमे बराबरी की हिस्सेदारी होती है अगर रिलेशनशिप में बराबरी की हिस्सेदारी होती है. तो यह रिलेशनशिप लम्बे समय तक चलती है इसमें कनफ्लिक्ट होने की सम्भावना ख़त्म हो जाती है. ऐसी रिलेशनशिप हमे साइकोलॉजिकल हैप्पीनेस देता है. इससे रिलेशनशिप बहुत ही अच्छी तरह से और लम्बे समय तक चलती है. रिलेशनशिप में सेक्स का होना एक दुसरे के टच में होना साइकोलॉजिकल हैप्पीनेस देता है, इससे साइकोलॉजिकल हैप्पीनेस बनी रहती है.

साइकोलॉजिकल ईगो

साइकोलॉजिकल जितने भी डिसऑर्डर होते है. वे सभी ईगो होते है  बाहर कुछ भी होता रहे उससे साइकोलॉजिकल कोई इफ़ेक्ट नही पड़ता है. मै और मै से रिलेटेड विचार ही ईगो की जड़ है. अगर ये ख़तम तो साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर ख़त्म अगर हम अपने आप को सब में देख ले की मै किसी से अलग नही हूँ वह मै ही हूँ तो वहां पर ईगो की सम्भावना ख़त्म हो जाती है. जहाँ पर ईगो ख़त्म हो जाता है. वहां पर हैप्पीनेस का रोल शुरू हो जाता है. जो व्यक्ति एक्चुअल में खुश रहने लग जाता है वह कभी भी साइकोलॉजिकल बीमार नही पड़ता है.

इमोशनल साइकोलॉजी

इमोशनल साइकोलॉजिकल Fear और Desire पर आधारित होती है और ये Fear और Desire तभी आते है. जब हम कुछ भी अपने mind में सोचने लगते है. जैसे किसी भी चीज़ से रिलेटेड कोई भी कहानी बना लेते है तब हमारी ब्रेन में इमोशनल Psychological thoughts Activate  होने लगते है, desire और fear के base पर अगर हमारी लाइफ चलती है. तो हमारी लाइफ ख़राब होने लग जाती है हम परेशान होने लग जाते है अगर हमारी लाइफ रियलिटी के base पर चलती है, तो हमारी लाइफ बहुत ही अच्छी होने लग जाती है. क्योकि रियलिटी में इमोशनल की कोई जगह नही होती है, रियलिटी हमको फ्री कर देती है हर चीज़ से, और इमोशन थौट्स हमको उलझा कर रख देते है.

लाइफ की सबसे बड़ी रियलिटी जो होती है वह है, डेथ’ हम इसे इस प्रेजेंट टाइम में देख ले की इसे एक न एक दिन मिट जाना है. इसे Accept कर ले तो हमारे लाइफ में करने के लिए बहुत कुछ आ जाता है. क्योंकि फिर बहुत बड़ी रेस्पोंस्बिलिटी आ जाती है. जो औरो लोगो की अपेक्षा बहुत बड़ी होती है फिर हम खाली बैठना छोड़ देते है हमारे दिमाग में कुछ न कुछ बड़ा करने की ललक लगी ही रहती है. क्योंकि फिर सारे फालतू के थौट्स ख़त्म हो जाते है और पूरा फोकस अपने goal को अचीव करने में लग जाता है.

 

Vikash Modi

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